नानपारा/बहराइच-शायर नवाज़ बहराइची के मकान पर अंजुमन गुलज़ारे अदब की तरही नशिस्त का अयोजना किया गया

 *अगर वह शाम से पहले जो घर ना आएगा- नवाज*



बहराइच से संवाददाता अहमद हुसैन की रिपोर्ट 



नानपारा/बहराइच-शायर नवाज़ बहराइची के मकान पर अंजुमन गुलज़ारे अदब की  तरही नशिस्त का अयोजना किया गया


मिसरे तरह पर शायर व साहित्यकार रोशन ज़मीर नानपारवी ने पढ़ा -

जुनूने इश्क़ का परवान चढ़ गया जिस दिन = कोई भी राह में ख़ौफ़ व ख़तर न आयेगा 

शम्स नानपारवी ने पढ़ा -

अभी तो रोक ले ऐ शम्स यार को वर्ना,

चला गया तो कभी लौटकर न आयेगा 

कैफ़ नानपारवी ने पढ़ा -

तमाम रात कटेगी बदल-बदल करवट ,अगर सनम वो मिरा रातभर न आयेगा 

सफ़ीर नानपारवी ने पढ़ा -

नज़र हटेगी न जब तक तुम्हारी आंखों से ,ज़मी पे घुंघरू जो पायल का गर न आयेगा 

नवाज़ बहराइची ने पढ़ा -

मिरी भी शाम वही आख़िरी बस होगी नवाज़ ,अगर वो शाम से पहले जो घर न आयेगा 

अबरार नानपारवी ने पढ़ा -

वहां पे आपने ही उसको बिठाया है ऐ दोस्त ,जहां बशर उसे कोई नज़र न आयेगा 

उमर नानपारवी ने पढ़ा -

हमारे साथ थे जो ज़ख़्म बांटने वाले 

उस उस सफ़र में कोई हमसफ़र न आयेगा ।

शायरों के अलावा पत्रकार सरफराज सिद्दीकी आदि थे।

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