*साहिर लुधियानवी और मजरूह सुल्तानपुरी की याद में गोष्ठी*
बहराइच से संवाददाता अहमद हुसैन की रिपोर्ट
नानपारा /बहराइच- साहित्यकार व समाज सेवी शारिक रब्बानी के नानपारा स्थित आवास पर भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में मशहूर तरक्की पसंद साहिर लुधियानवी और मजरूह सुल्तानपुरी की याद में एक गोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसकी अध्यक्षता संघ के उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शारिक रब्बानी ने की विशिष्ट अतिथि हुस्न तबस्सुम निहां, शकील भारती ,ध्यान प्रकाश श्रीवास्तव रहे। संचालन ज़मीर नानपारवी ने किया ।
इस अवसर पर शारिक रब्बानी ने कहा साहिर लुधियानवी का जन्म 8 मार्च 1921को लुधियाना पंजाब में हुआ था और मृत्यु 25अकतूबर 1980 को मुम्बई में हुई।और मशहूर तरक्की पसंद शायर मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म 1अक्तूबर 1919 को सुल्तानपुर में और देहान्त 24 मई2000 को मई में हुआ।इन दोनों ही शायरों ने फिल्म जगत से जुड़कर भी बहुत नाम रोशन किया।अनेक फिल्मों के लिए गीत लिखे साथ ही साथ तरक्की पसंद तहरीक को आगे बढ़ाने और मज़लूमो के हक़ में आवाज़ बुलंद में भी अग्रणी भूमिका निभाई।आजकल के हालात के मद्देनजर साहिर लुधियानवी की यह नज़्म - ख़ून अपना हो या पराया हो। नस्लें आदम का ख़ून है आखिर। जंग मशरिक में हो या कि मगरिब में। अम्न ए आलम का ख़ून है आखिर।। जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है। जंग क्या मसअलों को हल देगी।आग और ख़ून आज बख़्शेगी। भूक और एहतियाज कल देगी।। इसलिए ऐ शरीफ़ इंसानों। जंग टलती रहे तो बेहतर है। आप और हम सभी के आंगन में। इस मौके पर शायर सफीर नानपारवीं आसिफ, नानपारवि आदि ने अपना कलाम पेश किया।
