धौरहरा में बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को मिला सहारा, 2.26 करोड़ के उपकरण वितरित; कार्यक्रम की गोपनीयता और सांसद की नाराज़गी बनी चर्चा का विषय

 धौरहरा में बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को मिला सहारा, 2.26 करोड़ के उपकरण वितरित; कार्यक्रम की गोपनीयता और सांसद की नाराज़गी बनी चर्चा का विषय


धौरहरा (खीरी)।

रिपोर्ट/- कमल किशोर तिवारी 

गुरुवार को धौरहरा के बीआरसी परिसर में आयोजित एक विशेष जनकल्याणकारी कार्यक्रम में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा ने बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण वितरित किए। यह वितरण केंद्र सरकार की राष्ट्रीय वयोश्री योजना और एडीआईपी योजना के अंतर्गत किया गया, जिसके तहत 973 लाभार्थियों को करीब 2.26 करोड़ रुपये मूल्य के उपकरण मुफ्त में दिए गए।



कार्यक्रम में उपस्थित लाभार्थियों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। हालांकि मंत्री वर्मा कार्यक्रम में लगभग दो घंटे देरी से पहुंचे, लेकिन उन्होंने उपकरण वितरित कर लोगों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा,


“दिव्यांगजन कमजोर नहीं हैं, उन्हें बस थोड़ा सहारा चाहिए। ये उपकरण उन्हें समाज में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने का माध्यम बनेंगे।”



इस मौके पर विधायक विनोद शंकर अवस्थी, सीडीओ अभिषेक कुमार, एसडीएम राजेश कुमार, सीओ रमेश तिवारी, सहित कई अधिकारी व भाजपा नेता मौजूद रहे।


वितरण शिविर 25 जून तक जारी रहेंगे

दिसंबर 2024 से अप्रैल 2025 तक जिले के विभिन्न ब्लॉकों में चिन्हित किए गए 973 लाभार्थियों को यह सहायता प्रदान की जा रही है। उपकरण वितरण की यह प्रक्रिया 25 जून 2025 तक चलेगी।


कार्यक्रम की गोपनीयता और राजनीतिक विवाद पर उठे सवाल

कार्यक्रम जितना सामाजिक दृष्टि से सराहनीय रहा, उतना ही राजनीतिक विवादों और सूचना की गोपनीयता को लेकर भी चर्चा में आ गया।


धौरहरा से सपा सांसद आनंद भदौरिया जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो देखा कि मंच से उनका नाम और फोटो गायब था और आरक्षित सीट भी नहीं दी गई थी। इस पर नाराज़ होकर उन्होंने कहा,


"हमारे प्रयासों से ही यह कार्यक्रम संभव हो पाया है, लेकिन नाम और तस्वीरें हटाकर हमारे योगदान को नज़रअंदाज़ किया गया। जनता के दिलों में ही असली सम्मान होता है।"


इसके बाद वे मंच से उतर गए और अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम स्थल से चले गए। उनके साथ सपा नेता मुन्ना यादव, उत्तम वर्मा, मनीष शुक्ला और अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।


स्थानीय पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को नहीं मिली जानकारी

कार्यक्रम की सूचना आम जनता, पत्रकारों और कई स्थानीय कार्यकर्ताओं को नहीं दी गई, जिससे क्षेत्र में नाराज़गी फैली। योगगुरु और समाजसेवी राजहंस मिश्रा ने कहा कि


"इतने बड़े आयोजन की जानकारी न स्थानीय जनता को दी गई, न मीडिया को। मंच और माहौल से स्पष्ट था कि सब कुछ गुप्त रखा गया।"


निष्कर्ष:

यह आयोजन बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए राहत और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सराहनीय कदम रहा, लेकिन इसके राजनीतिक और प्रशासनिक पहलुओं ने इसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे कार्यक्रमों की सूचना जन-जन तक पहुँचाना जरूरी है, ताकि जनहित की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोग उठा सकें।

Post a Comment

Previous Post Next Post