तीन दिवसीय उर्स आगाज बाबा मासूम शाह (रह0) के 29 वें उर्स मुबारक पर उमड़ी अक़ीदतमन्दों की भीड़

 तीन दिवसीय उर्स आगाज बाबा मासूम शाह (रह0) के 29 वें उर्स मुबारक पर उमड़ी अक़ीदतमन्दों की भीड़।


By/- TV INDIAN NEWS 

बहराइच से संवाददाता अहमद हुसैन की रिपोर्ट 

 

मुल्क की तरक़्क़ी, खुशहाली, एकता, शांति और भाई चारे की मांगी गई दुआंए जगह जगह पर लोगों ने उर्स में आए जायरीन के लिये लगा लंगर खाना।



बाबागंज बहराइच। मशहूर हजऱत बाबा मासूम सा शाह (रह0) के 3 दिवसीय उर्स पाक का पहला दिन उद्घाटन के मौके पर  व मो0,अख्तर, ग्राम प्रधान इरशाद अली, अकील अहमद किंतुरी बाबा, पप्पू शाह, मोबीन खान, मोहम्मद  जमील, हसमत की उपस्थिति रही हजारों अक़ीदतमन्दों ने कुल शरीफ की तक़रीब में शिरकत कर मज़ार पर हाज़िरी देते हुवे अपनी बे पनाह मोहब्बतों का नज़राना पेश किया व आस्ताना हजरत बाबा मासूम शाह इन्तिज़ामिया कमेटी के सदर डॉक्टर अख्तर, अली  की रहनुमाई मे कुल शरीफ का आगाज़ मौलाना सैयद गुड्डू मियां अली की तिलावत कलाम अल्लाह से शुरू व नात मनकबत का नज़राना पेश किया। कुल की तक़रीब को खिताब करते हुवे नौजवान आलिम ए दीन शाही इमाम मौला जियाउद्दीन ने कहा कि अल्लाह वालों की बारगाह में हमेशा अदब व एहतिराम के साथ ही आना चाहिये क्यों कि बे अदब को कुछ भी नसीब नही होता उन्होंने कहा कि विलायत एक अज़ीम मनसब है जो अल्लाह पाक अपने नेक बन्दों को बड़ी इबादत व रियावत, तक़वा और ऐतहारत के बाद अता फरमाता है।मौलाना ने कहा कि औलिया किराम ने हमेशा शफ़क़त व मोहब्बत का रवैया अख्तियार फरमाया औलियाकिराम रसदो हिदायत के चराग होते हैं जो भी उनके नक़्शे कदम पर चलता है महबूब ए खुदा हो जाता है लिहाजा आज बहुत सदीद जरूरत है कि हम अपने अकायद व आमाल कुरआन व सुन्नत के मुताबिक करें और अल्लाह की मख़लूक़ के साथ शफ़क़त व मोहब्बत का मामला करें। तक़रीब को मौलाना मुफ़्ती सबीउल हसन  करते हुवे अल्लाह वालों की शान और उनके फ़ैज़ का जिक्र किया। कुल पढ़ने के बाद  की दुआ और सलात व सलाम के बाद कुल शरीफ के प्रोग्राम का एखतिताम हुआ। इन्तिज़ामिया कमेटी की जानिब से आय हुवे लोगों के दरमियान तबर्रुक और लंगर तकसीम किय हज़रत  बहराइच बाबा मासूम शाह के आस्ताना पर पहुंचकर मज़ार की  निशानदेही करते हुवे उनकी हाज़िरी भी कराई थी। कुल की तक़रीब में मर्दों के साथ साथ  खुवातीन की भी बड़ी तादाद मौजूद थी। इस मौके की तरफ से कई जगहों पर जायरीन के लिये सबील का भी इन्तिज़ाम किया गया था। 

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