आरोप निराधार, राजनीतिक द्वेष में दर्ज कराई गई एफआईआर : देवेंद्र कुमार पाण्डेय

 आरोप निराधार, राजनीतिक द्वेष में दर्ज कराई गई एफआईआर : देवेंद्र कुमार पाण्डेय।


अभी तक सुपर फास्ट न्यूज 

संवाददाता, गुरमीतसिंह।


सिंगाही खीरी।

कोतवाली सदर, लखीमपुर खीरी में नौकरी दिलाने के नाम पर आठ लाख पचास हजार रुपए की ठगी में दर्ज एफआईआर संख्या 0070/2026 को लेकर भारतीय जनता पार्टी के मण्डल अध्यक्ष देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि उनके विरुद्ध लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह असत्य, निराधार और दुर्भावनापूर्ण हैं।



 गौरतलब है कि 29 जनवरी 2026 को दर्ज रिपोर्ट में वादी सूर्यमणि मिश्रा ने आरोप लगाया है कि देवेंद्र कुमार पाण्डेय और उनके भाई धर्मेंद्र कुमार ने वर्ष 2019 में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 8.50 लाख लिए और नौकरी न लगने अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगाया था। जिसे लेकर देवेंद्र पाण्डेय ने कहा कि कथित लेन-देन की तिथि 18 जनवरी 2019 दर्शाई गई है, जबकि मुकदमा लगभग सात वर्ष बाद दर्ज कराया गया। इतने लंबे समय तक न तो कोई विधिक नोटिस दिया गया और न ही किसी सक्षम प्राधिकारी से शिकायत की गई। यह अस्वाभाविक विलंब स्वयं आरोपों की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि एफआईआर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि धनराशि किस तिथि, किस स्थान और किस माध्यम से दी गई। न तो किसी साक्षी का नाम है


और न हो लेन-देन का कोई ठोस विवरण। फोन पर बातचीत के दावे के बावजूद कोई कॉल डिटेल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2019 में संबंधित भर्ती प्रक्रिया, वादी की शैविक योग्यता अथवा आयु का कोई विवरण नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सरकारी नियुक्तियां निर्धारित एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत होती हैं, ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा नौकरी दिलाने का आरोप अपने आप में अविश्वसनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि 24 जनवरी 2026 को निघासन स्थित क्रय-विक्रय समिति कार्यालय में वादी और उनके पिता द्वारा अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की गई थी, जिसकी शिकायत उन्होंने संबंधित अधिकारियों से की थी। उसी के प्रतिशोध में यह एफआईआर दर्ज कराई गई है। मीडिया में प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताते


हुए पाण्डेय ने कहा कि बिना तथ्यात्मक सत्यापन के उनकी छवि को आपराधिक रूप में प्रस्तुत किया गया, जो मानहानिकारक है। संबंधित मीडिया संस्थानों और न्यूज पोर्टलों को लीगल नोटिस भेजे जा चुके हैं तथा असत्य और एकपक्षीय समाचारों को हटाने व खंडन प्रकाशित करने की मांग की गई है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष, वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मोबाइल कॉल डिटेल, बैंक खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी। साथ ही झूठी और दुर्भावनापूर्ण शिकायत करने वालों के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। देवेंद्र कुमार पाण्डेय ने जनता और मीडिया से अपील की है कि अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और जांच पूरी होने तक संयम एवं निष्पक्षता बनाए रखें।

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