सावन से पहले सरयू का रौद्र रूप, कटान से शिवालय पर संकट; कांवरियों के स्नान और जलभराव की राह हुई जोखिम भरी

 सावन से पहले सरयू का रौद्र रूप, कटान से शिवालय पर संकट; कांवरियों के स्नान और जलभराव की राह हुई जोखिम भरी

जालिमनगर पुल सरयू घाट पर लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर सवाल, खेत नदी में समा रहे; ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कटानरोधी इंतजाम की मांग की

रिपोर्ट - कमल किशोर तिवारी 

धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। सावन माह में कांवर यात्रा और पवित्र स्नान के लिए प्रसिद्ध बहराइच-लखीमपुर-आसाम मार्ग स्थित जालिमनगर पुल सरयू घाट इस बार सरयू नदी के तेज कटान और बढ़ते जलस्तर के कारण गंभीर खतरे की जद में है। हर वर्ष जहां लाखों शिवभक्त यहां स्नान कर जल भरकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचते हैं, वहीं इस बार घाट की बदहाल स्थिति श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही है।



सावन शुरू होने से करीब एक सप्ताह पहले ही सरयू नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया है। तेज बहाव के कारण घाट के किनारो पर लगातार कटान हो रहा है। करीब तीन दशक पुराने शिवालय तक नदी का कटान करती शिव मन्दिर को अपनी आगोश में लेने को आतुर है।

 मंदिर में पिछले सात वर्षों से सेवा कर रहे पुजारी राधेश्याम शुक्ला के अनुसार नदी अब मंदिर से महज छह मीटर की दूरी पर रह गई है। यदि कटान की रफ्तार इसी तरह जारी रहा तो शिवालय का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

पुजारी का कहना है कि नदी का बहाव और गहराई दोनों काफी बढ़ चुके हैं। ऐसे में घाट पर स्नान करना और कांवर के लिए जल भरना श्रद्धालुओं के लिए जान जोखिम में डालने जैसा हो सकता है। दूसरी ओर, सावन को देखते हुए सुबह-सुबह बड़ी संख्या में शिवभक्त प्रतिदिन पैदल यात्रा का अभ्यास करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन घाट की मौजूदा स्थिति उनकी चिंता बढ़ा रही है।

धौरहरा और ईसानगर थाना पुलिस के साथ घाट चौकी मुरावनपुरवा चौकी प्रभारी विलियम कौशिक भी लगातार घाट की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार घाट पर सुरक्षित स्नान की व्यवस्था न होने संबंधी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के माध्यम से शासन और प्रशासन को भेजी जा रही है, ताकि समय रहते आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जा सकें।


उधर, नदी 500-600मीटर की दूरी रामलोक मजरा स्वर्गलोक के किसानों की परेशानी भी बढ़ गई है। सरयू वेग और तेज कटान से उपजाऊ कृषि भूमि लगातार नदी में समा रही है। किसानों का कहना है कि खड़ी गन्ने की फसल को बचाने की उम्मीद खत्म होती जा रही है, इसलिए मजबूरी में वे फसल काटकर पशुओं को चारा खिलाने को विवश हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि लगातार हो रहे कटान के बावजूद अब तक जनप्रतिनिधि ,सिंचाई विभाग और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। नई तो मौके के हालात जानना मुनासिब समझा है 

लोगों ने मांग की है कि सावन में लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले कटान रोकने के लिए तटबंध और सुरक्षा व्यवस्था कराई जाए तथा घाट पर बैरिकेडिंग, गोताखोरों और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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