जरवल विकासखंड के अंतर्गत बराबर हो रही है हरे पेड़ों की कटान वन विभाग पर लग रहे हैं सवालिया निशान
टीवी इंडियन न्यूज़ चैनल से
जिला क्राइम रिपोर्टर
सफीक अहमद की रिपोर्ट
हम आपको बताते चले की एक तरफ उत्तर प्रदेश शासन हरे पेड़ लगाने की अभियान चला रहा है उत्तर प्रदेश शासन का नारा है एक पेड़ मां के नाम दूसरी तरफ वन विभाग के संरक्षण में जरवल विकासखंड के अंतर्गत बराबर हो रहा है हरे पेड़ों की कटान पूरे क्षेत्र के अंदर जरवल विकास खंड में आए दिन पूरे क्षेत्र के अंदर अगर देखा जाए और एक दिन का अनुमान लगाया जाए तो क्या 1 दिन में पूरे क्षेत्र में 20-25 पेड़ अवश्य काटे जाते हैं आखिर किसके मानसा के मुताबिक हरे पेड़ों की कटान हो रही है कल दिनांक 4 जुलाई 2026 को इब्राहिम नाम के ठेकेदार जो रसूलाबाद का निवासी है डिकौली काला मैं एक गूलर का पेड़ और एक नीम का पेड़ काटा गया जिस कि सूचना वन विभाग को दिया जा चुका है लेकिन अभी तक इब्राहिम ठेकेदार के खिलाफ वन विभाग के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है
जब कोई पत्रकार क्षेत्र का पेड़ काटते हुए देखा है और इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को देता है तो इन अधिकारियों के द्वाराकह दिया जाता है कि फला नेता या फल प्रमुख का का फोन आया था इसलिए कार्रवाई नहीं कर रहा हूं पूरे क्षेत्र के अंदर पेड़ कटान के संबंध में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुका है क्षेत्र में पर्यावरण दूषित हो रहा है और उत्तर प्रदेश शासन के अभियान को जो पेड़ लगाने का अभियान शासन के द्वारा चलाए जा रहा है इन अधिकारियों के द्वारा ठेंगा दिखाया जा रहा है जब कोई पत्रकार लकड़ी लोड की हुई ट्राली ट्रैक्टर पकड़ता है तो इन अधिकारियों के द्वारा ट्राली ट्रैक्टर पर जुर्माना नहीं किया जाता है लोडिंग गाड़ी पर₹6000 पेड़ का जुर्माना करके ठेकेदारों को छुट्टी दे दिया जाता है इस प्रकार आए दिन जरवल क्षेत्र के ठेकेदारों के हौसले हरे पेड़ काटने के लिए बुलंद हैं ठेकेदार लोगों का अधिकारियों के मिली भगत होने के कारण ना तो पत्रकारों के द्वारा खबर चलाने का कोई असर होता है और ना पेड़ हरे पेड़ कटान को रोका जाता है यही कारण है कि बहराइच जिला के अंदर मानसून नहीं पहुंच पाता है जिससे किसानों के फासले नष्ट हो रही हैं और बरसात नहीं हो रही है आखिर इन अधिकारियों के द्वारा इस तरह का हरे पेड़ कटान का भ्रष्टाचार कब तक चलेगा अगर हरे पेड़ कटान पर तत्काल प्रभाव से रोक नहीं गया और इन लकड़ी माफियाओं के ऊपर प्रशासन के द्वारा कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया तो इसी तरह हरे पेड़ करते रहेंगे और जलवायु दूषित हो जाएगी
अब देखना यह है कि यह खबर वायरल होने के बाद इन हरे पेड़ कटान वाले ठेकेदारों के खिलाफ जिला फॉरेस्ट सरकारी वन संरक्षण नियम अधिनियम के मुताबिक क्या कार्रवाई करते हैं
